क्या भाजपा सरकार राजा उदय प्रताप सिंह( राजा भैया के पिता) से डर गई है ?


उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की भदरी रियासत के 87 वर्षीय महाराज राजा उदय प्रताप सिंह से भारतीय जनता पार्टी की सरकार डर गई है उसे डर तब नहीं लगा जब राजा उदय प्रताप सिंह ने प्रयागराज के झूसी स्थित अपनी कोठी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दान कर दिया ।



इसके अलावा राजा उदय प्रताप सिंह ने विश्व हिंदू परिषद , बजरंग दल और तमाम हिंदूवादी संगठनों को भृमि और आर्थिक मदद कई बार उपलब्ध कराई । भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर लगातार वोट की फसल काटती रही परंतु राजा उदय प्रताप सिंह ने कश्मीरी पंडितों के लिए और कारसेवकों के लिए सैकड़ों ट्रक राशन भिजवाया और प्रचार तक नहीं किया ।


पर्यावरण और जीव जंतुओं के प्रेमी जापान से एग्रीकल्चर में स्नातक और भारत के प्रतिष्ठित दून स्कूल में पढ़े हुए हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर और असहयोग आंदोलन और नमक कानून के विरोध में बड़ी भूमिका निभाने वाले राय बजरंग बहादुर सिंह जी के दत्तक पुत्र महाराजा उदय प्रताप सिंह से भारतीय जनता पार्टी इसलिए डर गई क्योंकि वह हर वर्ष एक बंदर की पुण्यतिथि पर मुहर्रम के दिन भव्य भंडारे का आयोजन किया करते हैं ।



1998 में उस बंदर की मृत्यु मोहर्रम के जुलूस के दौरान ही हो गई थी । स्वयंभू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी की सरकार के नौकरशाहों को पता नहीं किसने बता दिया कि भंडारा होने के कारण दो समुदायों के बीच में वैमनस्य की संभावना है इसीलिए प्रशासन ने राजा उदय प्रताप सिंह को उनके ही राजमहल में नजरबंद कर दिया है ।



परंतु समझने और सोचने वाली बात यह है कि इस तरह की कोई समस्या बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कभी नहीं आई 2015 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तब मोहर्रम का जुलूस चार दिन बाद निकला था और भंडारा अपने समय पर हुआ था 2016 में भी भंडारा और जुलूस दोनों एक साथ निकला इसके पहले के वर्षों में कभी इस प्रकार की कोई समस्या नहीं आई परंतु शायद भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों की अकर्मण्यता के चलते ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं । बड़ा प्रश्न यह है कि सनातन धर्म की रक्षा और हिंदुत्व का ठेकेदार बनने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उसके तथाकथित राष्ट्रवादी मंत्री क्या कर रहे   हैं ? 87 वर्ष के एक बुजुर्ग को भंडारा करना तो दूर हनुमान चालीसा का पाठ भी नहीं करने दिया जा रहा है । इसके अलावा कुंडा के उप जिलाधिकारी का आदेश है कि सभी भगवा झंडे कल 10 : 00 बजे तक उतार दिए जाएं । राजा उदय प्रताप सिंह प्रतिदिन कुंडा हरनामगंज रेलवे स्टेशन पर गुजरने वाले रेलवे के यात्रियों के लिए जलपान की व्यवस्था करते हैं इसके लिए उन्होंने बाकायदा 15 लोगों की नियुक्ति भोजन बनाने के लिए और 75 लोगों की नियुक्ति उसके वितरण के लिए की है । ये प्रतिदिन अपना कार्य करते हैं । इसके अलावा राजमहल में मैंने स्वयं जाकर देखा है सब्जी काटने की मशीन आटा गूंथने की मशीन रोटी बनाने की मशीन वहां पर उपलब्ध है ।


सरकारें आज पॉलीथिन पर प्रतिबंध और जल संरक्षण का आंदोलन चला रही है परंतु विगत कई वर्षों से भदरी राजमहल के अंतर्गत आने वाले किसी भी बाजार में पॉलिथीन की बिक्री सख्त मना है इसके अलावा अधिकारियों के परमिशन के परमिशन के बावजूद वृक्षों की कटान मना है यहां तक कि जानवरों के लिए पानी पीने की ऐसी व्यवस्था की गई है की तालाबों के किनारे लिखा गया है कि " यहां पर साइकिल का धुलना मना है " राजा उदय प्रताप सिंह ने प्रकृति से प्रेम के चलते ही " प्रकृति " नामक संस्था की स्थापना की है जो संस्था 43 किलोमीटर परिक्षेत्र में फैले हुए भदरी रियासत के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करती है । पिछले दिनों राजा उदय प्रताप सिंह का 1 टवीट चर्चा का विषय बना हुआ था जिसमें उन्होंने थल सेना अध्यक्ष बिपिन रावत के ऊपर इसलिए प्रश्नचिन्ह उठाया था क्योंकि एक ही मंच पर परमवीर चक्र से सम्मानित वीर अब्दुल हमीद और अरुण खेत्रपाल की पत्नी में से जनरल रावत ने अब्दुल हमीद की पत्नी का पैर छुआ और अरुण खेत्रपाल की पत्नी का नहीं । राजा उदय प्रताप सिंह वही शख्स हैं जिन्होंने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी का विरोध करते हुए भदरी रियासत को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया था परिणाम यह हुआ कि इंदिरा गांधी को वहां पर सेना भेजनी पड़ी थी । राजा उदय प्रताप सिंह के खजाने के द्वार हमेशा गरीबों के लिए खुले रहे हैं । प्रयागराज से लखनऊ रेल मार्ग में पढ़ने वाले कुंडा हरनामगंज रेलवे स्टेशन पर यह चीजे देखी जा सकती हैं । ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो बिना प्रचार ऐसा कार्य करते हैं । ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार  महाराज राजा उदय प्रताप सिंह से डर गई है । या फिर यह सरकार हिंदू और मुसलमानों के बीच में स्वयं बड़ी खाई खड़ी करना चाहती है ताकि उसकी फसल कटती रहे ।